मैं
मैं साहिल पर उकेरा कोई नाम नहीं जो एक लहर से मिट जाऊँगा,
मैं वो बादल भी नहीं जो बरस कर खत्म हो जाऊँगा,
मैं एक पवन का झोंका नहीं जो आ के बह जाऊँगा,
ना ही मैं चाँद हूँ जो बादलों के पीछे छुप जाऊँगा,
नहीं मैं वो पानी जो गर्मियों मे सूख जाऊँ,
ना मैं हूँ वो नदी जो पत्थर आते ही बदल अपना रुख जाऊँ,
मैं...
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मैं
मैं साहिल पर उकेरा कोई नाम नहीं जो एक लहर से मिट जाऊँगा,
मैं वो बादल भी नहीं जो बरस कर खत्म हो जाऊँगा,
मैं एक पवन का झोंका नहीं जो आ के बह जाऊँगा,
ना ही मैं चाँद हूँ जो बादलों के पीछे छुप जाऊँगा,
नहीं मैं वो पानी जो गर्मियों मे सूख जाऊँ,
ना मैं हूँ वो नदी जो पत्थर आते ही बदल अपना रुख जाऊँ,
मैं तो वो रंग हूँ जिसे अपने दिल से मिटा ना पाओगे,
हूँ मैं वो खुशबू जिसे कहीं दबा ना पाओगे,
चाहो दूर हो जाओ मुझ से कितना ही यादों में फिर भी रह जाऊँगा,
आँखों मे आँसू ना सही, यादों से होठों पे मुस्कान दे जाऊँगा,
मेरी इन आँखो की चमक को भुला ना पाओगे,
अनकही बात को समझोगे तो याद आऊँगा,
ख्वाब, हवा, पानी, चाँद की तरह मेरे मिटने का सवाल नहीं,
क्योंकि,
मैं वो गीत हूँ जिसे चाहो भी तो अपने लबों से हटा ना पाओगे,
जब भी गुनगुनाओगे तो फिर सामने आ जाऊँगा,
'आपकामित्र' गुरनाम सिंह सोढी
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